Category: Dil se

वक्त

 इन्सान बस खुशियो को खोज रहा है| कल की आस मे आज को खो रहा है,   यह वक्त है जनाब बीतता जा रहा है आज नही कल करूगा        बस यही दावा करता जा रहा है, कल की आस मे ,आज को खो रहा है                 […]

तुमको पता है?

तुमको पता है? मोनालिसा की मुस्कान कहीं खो गई है! उसकी आंखों की कशिश  और होठों की मुस्कुराहट, जिसे दुनिया का कोई भी शख्स ढूंढ ही लेता था।लूव्र की दीवार से, वह मेरे कोने में आ छुपी है।  डरी सहमी सी वहां खड़ी है।थक गई थी मुस्कुराते हुए; लाखों की भीड़ देखते- देखते..आज रोने का मन […]

आमंत्रण

आमंत्रण  आइए श्रीमान फिर पीलीभीत शहर में,  कान्हा वाली बांसुरी भी आपको बुलाती है।  हिरणों की कूदफाँदबाघ भी लुभा रहे हैं, खुशबू बाँसमती की दुनिया को भाती है। चूकना न आप ‘चूका” बाइफर’ में आने को, ‘सात-झाल’ ‘साइफन’ वादियाँ बुलातीं हैं।देवहा, माला, शारदा डैम की अनूप छटा, उद्गम से आदि गंगा’ गोमती’ बुलातीं हैं।।—- गौरी शंकर […]

कभी मां बाप की कीमत कभी घर बार की कीमत।

Cover Pic Credit:https://www.google.com/imgres कभी मां बाप की कीमत कभी घर बार की कीमत। अगर न हो पता लगती है तब परिवार की कीमत। हमेशा जीत को भी जीत लेता है जो दुनिया में, समझता खूब है बस इक ज़रा सी हार की कीमत। महज़ रोटी की खातिर चैन से सोया न जो छः दिन। वही […]

हे रघुनन्दन ! दशरथ नन्दन

Cover Pic Credit:https://www.google.com/imgres हे रघुनन्दन ! दशरथ नन्दन,  करबद्ध , तुम्हें शत शत वन्दन । हे दिव्य रूप! सन्ताप हरो सबके आँचल में हर्ष भरो मस्तक पर धार्य मुकुट, चन्दन,  हे रघुनन्दन! दशरथ नन्दन…, करबद्ध , तुम्हें शत शत वन्दन । वन गमन तुम्हारा अति पावन,  जो था आज्ञा का अनुपालन,  तिस पर रोया कानन- […]

जब मैं तुमसे मिली

            जब मैं तुमसे मिली सब कुछ याद है उस दिन का कहाँ जानती थी कि एक दिन ऐसा भी हो जाएगा  मिलते ही तुमसे ये दिल मेरा तुम्हारा हो जाएगा  पल पल हरपल तुम्हारे ही खयालों में खो जाएगा मेरे इस पागल जी को फिर और नही कुछ भायेगा तेरे वास्ते कुछ भी करने […]

वह लड़की

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के एक नंबर प्लेट फार्म पर 25 वर्षीय हैण्डसम आरव अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहा था । सर्दी अपने शबाब पर थी , शाम के 7 बजे थे परंतु कुहासे और ठंड के कारण प्लेटफॉर्म  पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ था … कोहरे के कारण ट्रेन एक – एक […]

हैलो शिखा…..

इन दिनों त्यौहारों का ही माहौल था, शाम का समय था और पूरी बस खचाखच भरी हुई थी । आनन -फानन में मीनू ने किसी तरह खुद को बस के भीतर प्रवेश कराया और किस्मत से एक सीट मिल गई तो मीनू चट से बैठ गई ।जयपुर से रात का सफर था सुबह वो आराम […]

आजादी है ,महिला का हक पहला

बालीवुड में लज्जा ,मदर इंडिया, दामिनी ,मर्दानी जैसी फिल्में भले ही अपनी पटकथा से स्त्री सशक्तिकरण की बात कहें और लाखों दर्शकों से तालियां बजवा भी लें  मगर  भारतीय समाज की असली हालत एकदम ही अलग है । आज भी  राजधानी दिल्ली तक में युवतियों को   सरेआम  छींटाकशी, हिंसा, प्रताड़ना, छेड़छाड़ , बस रेलगाडी […]

Bachpan

सोचती हूँ तुम्हारा बचपन फिर वापस उठा लाऊँ वो प्यारे मीठे दिन फिर एक बार जी जाऊँ  फिर तुम्हें कभी गोद में ख़िलाऊँ  तो फिर कभी तुम्हारा घोड़ा बन जाऊँ फिर तुम्हें खाना खिलाने के हर रोज़ नए जतन जुटाऊँ फिर तुम्हें गुड्डा बना कर खूब सजाऊँ फिर तुम्हारा बचपन तस्वीरों में क़ैद कर जाऊँ  फिर […]

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