Category: Dil se

बदनाम गली का घर

मिहिर , मैंने आपके कपड़े और टिफिन बैग में रख दिये हैं …. उसने आंखों ही आंखों में उसे अपनी कोठरी के अंदर आने का इशारा किया और मानी के अंदर आते ही उसे अपनी बाहों में भर लिया था … मानी तुझे छोड़ कर जाने का  बिल्कुल भी मन नहीं करता लेकिन मेरी मजबूरी […]

संवेदना

     आरवी  और गर्व में दोस्ती थी ,  उन दोनों के बीच क्लास में प्रथम पोजीशन के लिये हमेशा  कंपटीशन रहता था  …. इधर कुछ दिनों से गर्व को बार बार बुखार आ जाता था \ वह कमजोर भी होता जा रहा था … जब उसके पापा ने उसको दिल्ली ले जाकर सब टेस्ट कराये […]

नई उम्मीदें

भुला नहीं पाएंगे हम 20 और 21 साल को ,डरे डरे सहमे सहमे, सब लोगों के व्यवहार को ।सड़के सूनी हो गई थी, मानो रेगिस्तान का मैदान हो, पर चिड़ियों की आवाज चहक-चहक कर आती थी ,झरने की आवाज, गीत भी गुनगुनाती थी ।घर बैठकर हमने आनंद भी खूब उठाया था। अंताक्षरी खेल, रामायण देख […]

नववर्ष के लिये संकल्प ……

2021 दुःखद यादों के साथ अंततः बीत ही गया …..कालचक्र तो अनवरत् गतिवान रहता है ….   वर्ष 2022 का आगमन होने ही वाला है … एमीक्रोन डरा रहा है …फिर भी 7में सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुय़े नववर्ष का स्वागत् हम सबको सुखद उम्मीदों  और आशाओं के साथ करना चाहिये …  नये […]

खुशियाँ

जैसे बागों में बहारों का आ जानाकर्णप्रिय संगीत का गुंजायमान होनाजैसे आँगन में चिड़ियों का चहचहानाचारो तरफ नजारों का खिल जानाकोयल की कुहुक से अम्बर का गूंजनाढलते सूरज से गगन का सिंदूरी हो जानाशामों में तितली के रंगों का उतारनाबरसात के मौसम की रिमझिम फुहारवो तुम्हारा अपने हाथों की उंगलियों कामेरे हाथों की उंगलियों में […]

मेरा हौसला

ट्रि. ट्रि .ट्रि. “ आप निशा जी बोल रही हैं ।‘’ “जी  , बताइये मैं आपकी क्या सेवा कर सकती हूं । “ “आपके लिये एक बहुत शुभ समाचार है … आपके नाम का चयन प्रतिष्ठित अर्जुन एवार्ड के लिये  किया गया है । “ प्रसन्नता के अतिरेक से वह क्षण भर को संज्ञाशून्य हो  […]

निर्णय

शिवि मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती थी । वह अपने बॉस रुद्र को पहली नजर में ही पसंद करने लगी थी ।  कॉफी के प्यालों के साथ दोनों के बीच में नजदीकियां बढती गई । लगभग दो साल तक मिलना जुलना , घूमना फिरना आई लव यू तक पहुंच गया और किन्हीं कमजोर पलों में […]

मातृत्व

निम्न मध्यवर्गीय प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका सुषमा जी आज पहली बार ट्रेन के ए. सी. कूपे में बैठने के लिये छोटे बच्चे की तरह उत्साहित थीं। उन्होंने सदा  कल्पना लोक में विचरण करते हुये ए.सी. कूपे की ठंडक का अनुभव किया था। बेटी की जिद और उसी की अनुकंपा से उन्हें आज यह सौभाग्य मिलने […]

स्त्री

 वो तुम न थे वो तुम्हारा गुरुर था  जिसने मुझे एहसास दिलाया कि मैं एक स्त्री हूँ और तुम्हारे  मुकाबले मेरा अपना कोई वजूद नही मेरी खुशी मेरा स्वाभिमान सब बेमानी तुम्हारे झूठे अहंकार के चलते मुझे कब क्या बोलना है क्या नही ये कभी समझ ही नही पाई धीरे धीरे तुम्हारी खुशी की खातिर […]

महिलायें अपनी खुशी के लिये जीना सीखें

दुनिया की आधी आबादी महिलाओं की है। वही। इस सृष्टि की जननी है, फिर भी स्त्री को दोयम् दर्जे का समझा जाता है। पुरुष के साथ बराबरी के हक की मांग  करके भी वह सदा से समाज के द्वारा छली जाती रही है। आवश्यकता इस बात की हैकि महिलायें स्वयं अपने महत्व को पहचानें । […]

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