Category: Dil se

जेठ की धूप

जेठ महीने की चिलचिलाती धूप में पसीने से लथपथ सरला सिर पर ईंट रख कर ढो रही थी  . आज कई दिनों के बाद उसे काम मिला था. पेट की आग जो न करवाये वह थोड़ा है .  6 वर्षीय मुन्नी  अपने 3 वर्षीय  भाई  नन्हें छुट्टन के साथ पेड़ की छांव  में बैठी हुई […]

बोन मैरो

“माँ मैं नर्वस फील कर कही हूँ , इतने बड़े स्टेज पर बैठ कर गीत गाना , मुझसे नहीं होगा .मैं अपना नाम वापस लेती हूँ.” सरिता जी ने बेटी के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुये कहा , “ लाड़ो ,  जीवन में ऐसे अवसर बार बार  नहीं  मिलते हैं .तुम्हे  मिल रहा […]

40 की उम्र को अपने ऊपर हावी न होने दें …..

आजकल अनेक महिलायें अपने घर की दहलीज पार कर नौकरी या व्यवसाय  में व्यस्त हैं परंतु अभी भी बहुत सी महिलाओ की बड़ी आबादी ऐसी है जो गृहिणी कहलाती हैं .. यह महिलायें सुबह से रात तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं . झाड़ू पोछा , बर्तन , खाना आदि कामों में व्यस्त रहने […]

लौट आओ ख़ुशी

पिछले साल  मेरी क्लास में एक नई लड़की आयी थी,बेहद बातूनी,चंचल, और ज़िंदगी से भरपूर..होगी यही कोई उन्नीस बीस साल की,नाम था उसका “ख़ुशी” हर दिन एक नई कारस्तानी करती,डांटने पर,नित नये बहाने बनाते हुएबोलती हुई आँखों से फिर उन्हें सहेजतीदेखते ही देखते न जाने कब,साँवली सलोनी वो नटखट सी चुहिया,हम सभी के दिलों में […]

तन मन रंगों से सराबोर हो गया ——

‘आज बिरज में होरी रे रसिया ‘  गले में ढोलक लटकाये हुये गुलाटी जी गुलाल उड़ाते हुये होली के खुमार में पूरी तरह डूबे हुये रमन को आवाज दे रहे थे । वह तो पहले से ही प्लेट में गुलाल और गुझिया सजा कर तैयार बैठे थे । बस शुरू हो गया ‘रंग बरसे भीगे […]

खेलत फाग परस्पर मिलि के राधा कुंवर कन्हाई

मथुरा – कृष्ण का पावन जन्म स्थान कृष्ण सखी  कालिन्दी के घाटों पर बहती मलयज हवा के सुगन्धित हवा के सुगन्धित झोंके,विश्रामघाट पर विहार करती नौकाओं के मनोहारी दृश्य,नंद गांव,बरसाना,गोकुल,दाऊ जी और वृंदावन हर स्थान पर राधा कृष्ण के हजारों नेह कथानक ,कण कण मे   भक्ति का मनोहारी माधुर्य  ,बृज की सीमा में आते […]

मैं एक चीज़ को एक ही बार कह सकती हूँ

मैं एक चीज़ को एक ही बार कह सकती हूँ,  हज़ार दफ़ा दुआ माँग सक्ती हूँ,  और सौ दफ़ा ख़्वाब में सपने सजा सकती हूँ!  यकीन है कि जब आप दिल में कोई बुनियाद बना लें,  हकीकत का बगीचा एक दिन जरूर बनेगा..  – शुऐब अनम

रोज डे

 ललिता अपनी बॉलकनी पर खड़ी हुई थी तभी उनकी निगाह  अपने घर के सामने रहने वाली धरा  के कमरे में पड़ गई थी . आज रोज डे पर शिशिर अपनी पत्नी धरा को रोज का बुके देकर आलिंगनबद्ध करते देख कर वह स्वयं  भी अपने प्रियतम से रोज के बुके लेकर उनकी बाहों में लिपटने […]

नव वर्ष का उपहार

20 वर्षीय सुमित्रा जो नीराजी के यहाँ मेड नहीं   उनकी बेटी की तरह रह रही थी  . वह  कल रात में उससे बात करती हुई अच्छी भली सोईं थी लेकिन वह रात उनके जीवन की अंतिम रात हो गई थी . उन्हें  इस हालत में देख वह घबरा उठी थी और वह फूट फूट […]

मैं नारी हूँ

सदियों से पूज्य रही हूँकन्या रूपेण मातृ रूपेणसीता भी मैं हूँ राधा भी मैं हूँद्रौपदी और गांधारी भी मैं हूँमैं नारी हूँकभी बेटी तो कभी बहनकभी प्रेमिका तो कभी पत्नीमैं ही माँ भी हूँजीवन में पल पल रूप बदलते रहेपर रहती तो नारी ही हूँमैं नारी हूँसदा सदा से कर्तव्यों कीबेड़ियों में जकड़ी रहती हूँअपने […]

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