Category: Dil se

के. के. का इस तरह जाना……

Image Source : google.com कृष्ण कुमार कुन्नथ अर्थात् के. के. का मंच से इस तरह से विदा होना मन में अनेक प्रश्न खड़े करता है … आज शो बिजनेस जिस मुकाम पर है ….. वहाँ गलाकाट प्रतिद्वंदिता के कारण कलाकार के लिये स्वयं को स्थापित करने के लिये अपने शरीर और दिल के साथ बहुत […]

पर्यावरण

अपनी धरती माँ से हम सब कितना कुछ ले लेते हैं अपने ही आराम की खातिर कितना दोहन करते हैं तरक्की के नाम पर हमने सारे जंगल काट दिए पेड़ लगाने थे जहाँ पर महल अटारी बाँट दिए जब भी देखो बरसे बादल धरा यहाँ रो देती है कहाँ संजोऊं इस पानी को जड़ें नहीं […]

कायाकल्प

निया निशि जी और अखिल जी की इकलौती लाडली थी , जिस दिन से उसकी सगाई हुई है दोनों लोग शादी की तैयारियों में बिजी रहते थे . आज जब निशि गेस्ट की लिस्ट फाइनल करनें में बिजी थीं तभी उनका मोबाइल बजा था …. उन्होंने मोबाइल पर अपने समधी अर्जुन जी का नाम देखा […]

डिप्रेशन

हम सभी ने अपनी जिंदगी के किसी न किसी अवसर पर स्वयं को उदास और हताश अवश्य महसूस किया होगा . असफलता , संघर्ष ,और जीवन में किसी अपने से बिछड़ जाने के कारण दुःखी होना बहुत ही आम और सामान्य सी घटना है परंतु यदि अप्रसन्नता , उदासी , दुःख , लाचारी , निराशा […]

Enabling girls

बालिकाओं के लिए शिक्षा के साथ-साथ जीवन कौशल कार्यक्रम जिसमें बालिकाएं जो अल्पसंख्यक समाज और मुस्लिम समाज से थी और जिनके अभिभावक उन्हें विद्यालय में भेजना भी पसंद नहीं करते थे ।बालिकाओं को मैंने अपने प्रयासों से विद्यालय में नामांकित तो कराया ही ,साथ ही साथ उन्हें सशक्त बनाया एवं आत्मनिर्भर बनाया । यह सफर […]

इंसानियत

इंसानियत दिखाने व बताने के लिए, मनुष्य पहले इंसान बन के तो देख , जीवन में कुछ बनने से पहले, कुछ सोच समझकर कुछ करके  तो देख। यह जीवन इतना भी छोटा नहीं, कि आंसू बहाने से कलुस्ता मिट जाए, दया करके तो देखो किसी पर, जीवन भर की याद बन के तो देख। दया […]

शिक्षक

 शिक्षक राष्ट्र निर्माता होता है। वह अपने प्रयास और शिक्षण तकनीकों से छात्रों के भविष्य का आधारशिला रखता है। यह कहना है राज्य अध्यापक पुरस्कार 2019 से पुरस्कृत शिक्षक खुर्शीद अहमद का, सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय सहवा क्षेत्र देसही देवरिया का।*बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता हेतु प्रयास*–       ‌‌ विज्ञान विषय को रुचिकर, बोधगम्य […]

एक स्त्री की कहानी उसी की जुबानी

आज स़े तीस साल पहले स्त्री की मानसिक पीड़ा का चित्रण करती मेरी कहानी शायद आज भी पुरुष के अहंकारी वर्चस्व से आजाद नहीं हो पाई…. फरवरी महीने की हल्की हल्की ठंड, कुछ देर पहले बारिश भी हो चुकी थी ….. मौसम सुहावना और खुशनुमा था … लक्ष्मी जी रोजाना शाम को सोसायटी के गार्डेन […]

अपने ऊपर हावी न होने उम्र को दें …..

आजकल अनेक महिलायें अपने घर की दहलीज पार कर नौकरी या व्यवसाय  में व्यस्त हैं परंतु अभी भी बहुत सी महिलाओ की बड़ी आबादी ऐसी है जो गृहिणी कहलाती हैं .. यह महिलायें सुबह से रात तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं . झाड़ू पोछा , बर्तन , खाना आदि कामों में व्यस्त रहने […]

वृद्धालय

ट्रि.ट्रि.ट्रि“ “हां, सुयश आज इतने दिनों बाद मेरी याद कैसे आ गई?’सौम्या कैसी है तुम?’’ “मैं तो ठीक हूं, सीधे सीधे काम की बात करो।‘’ “एक प्लान है, उसके लिये मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है।‘’ “साफ साफ  बोलो ,भूमिका न बनाओ।‘’ “मेरे पास एक बिल्डर आया था ।वह अपनी कोठी और बगीचे को तोड़ […]

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