Tag: poem

वक्त

 इन्सान बस खुशियो को खोज रहा है| कल की आस मे आज को खो रहा है,   यह वक्त है जनाब बीतता जा रहा है आज नही कल करूगा        बस यही दावा करता जा रहा है, कल की आस मे ,आज को खो रहा है                 […]

मैं स्त्री हूं

          मैं स्त्री हूँ            जग की जननी हूँ            सृष्टिकर्ता हूँ             परंतु विडम्बना देखो….           अपनी ही रचना              ‘पुरुषों’  के हाथों               सदा से छली जाती रही हूँ                 मेरी अस्मिता से खेलता है               रौंदता है….  मसलता है …..                 अस्तित्व को नकार कर                  उस पर बलपूर्वक राज करना चाहता है                 मैं स्त्री हूँ                जन्मते ही दोयम्                बन जाती हूँ                 ‘बेटी […]

“दिल की बात”

नहीं की बेवफ़ाई है बचाया झूठ से दामन साफ़गोई से हैं रहते  सुख दुःख में हैं सम रहते शिक़ायत हम नहीं करते छुपाए लाख ग़म दिल में नुमायश हम नहीं करते प्रश्नपत्रों को जीवन के ख़ुद ही हल किया करते बाँटते फूलों की ख़ुशबू नहीं कांटों सा हैं चुभते  जो हम ठान लेते हैं वही […]

दशरथी अम्मा

आइये आज आप सबको अपनी “दशरथी”अम्मा से मिलवाते हैं…ये कई वर्षों से घर के पास रहती हैं और घरों में काम करने जाती हैं ख़ूब बढ़िया अवधी भी बोलती हैं..जब ये हँसती हैं तो इनका बस एक दाँत ही कमाल करता है.. अब इनका नाम “दशरथी”कैसे पड़ा ये भी बड़ा दिलचस्प किस्सा है..ये दशहरे वाले […]

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